✍️ शैलेश सिंह गौतम
👉🏼 _सत्ता की आड़ में अवैध खनन का खेल, अफसर बोले“जानकारी नहीं”, गांव-गांव उजड़ रही उपजाऊ जमीन
असोथर/फतेहपुर:-थाना क्षेत्र असोथर में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार चरम पर है। खनन माफिया पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं और जेसीबी मशीनों से खेतों व बंजर जमीनों का सीना चीरकर मिट्टी निकाली जा रही है। ओवरलोड ट्रैक्टरों से खुलेआम मिट्टी की सप्लाई हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार असोथर, जरौली, कौहन, देइमऊ, घाटमपुर, हरनवा, बेसडी, ऐझी, सरकंडी, बौडर, कटरा और कंधिया सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में खनन माफिया रोज ठिकाना बदलकर अवैध खनन कर रहे हैं। दिन-रात जेसीबी मशीनों की गड़गड़ाहट से धरती छलनी हो रही है और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि खनन माफिया खेतों की उपजाऊ परत तक हटा ले जा रहे हैं, जिससे भविष्य में खेती संकट में पड़ सकती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि माफियाओं का नेटवर्क इतना सक्रिय है कि अधिकारियों के पहुंचने की भनक लगते ही जेसीबी मशीनें बंद कर दी जाती हैं और ट्रैक्टरों को गांवों में छिपा दिया जाता है।
👉🏼 *सत्ता का संरक्षण?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई खनन माफिया खुद को सत्ता पक्ष से जुड़ा बताते हैं और इसी रसूख के दम पर बेखौफ होकर अवैध खनन करा रहे हैं। सत्ता की आड़ में उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं है, जिससे उनका मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है।
👉🏼 *जरौली चौकी क्षेत्र बना हॉटस्पॉट*
जरौली चौकी क्षेत्र में 2-3 जेसीबी और आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों से बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन और ढुलाई की जा रही है। मिट्टी को औने-पौने दामों में बेचा जा रहा है।
👉🏼 *अफसरों का ‘जानकारी नहीं’ राग*
जब इस मामले में थाना प्रभारी धीरेंद्र ठाकुर से बात की गई तो हर बार की तरह एक ही जवाब रहा जानकारी में नही है लेकिन दिखवाते है।
वहीं खनन अधिकारी देशराज सिंह ने भी अवैध खनन की जानकारी न होने की बात कही, हालांकि जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
👉🏼 बड़े सवाल खड़े
जब पूरे क्षेत्र में दिन-रात जेसीबी की आवाज गूंज रही है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी अनजान कैसे हैं? क्या यह महज लापरवाही है या फिर सिस्टम खनन माफिया के आगे झुक चुका है?
असोथर में जारी अवैध खनन अब सिर्फ पर्यावरण और किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रशासन की साख के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

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